· नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत - दुर्लभ ईंधन भण्डारों की बचत
· प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण हितैषी
· दीर्घकालीन प्रथम जल विद्युत परियोजना 1897 में पूरी कर ली गई थी जो अब भी दार्जिलिंग में चल रही है ।
· ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में उत्पादन लागत, प्रचालन और अनुरक्षण कम है ।
· तत्काल लोड स्वीकारने/अस्वीकार करने तथा जल्दी से चालू और बंद किए जाने वाली क्षमता के कारण व्यस्ततम मांग को पूरा करने तथा तंत्र की विश्वसनीयता और स्थिरता बढ़ाने के लिए उपयुक्त है ।
· ताप विद्युत (35%) तथा गैस (लगभग 50%) की तुलना में इसकी क्षमता अधिक (90% से ऊपर) है ।
· शुरूंआती स्थापना के बाद उत्पादन लागत मुद्रा स्फीति के प्रभावों से मुक्त रहती है ।
· भण्डारण आधारित जल विद्युत योजनाओं से विद्युत के साथ-साथ सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, पेय जल आपूर्ति, नौकायन, मनोरंजन, पर्यटन तथा मत्स्य पालन जैसे लाभ प्राप्त होते हैं ।
· सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थित होने के कारण पिछड़े क्षेत्रों का विकास करती है । (जैसे - शिक्षा, चिकित्सा, सड़क संचार, टेली कम्युनिकेशन इत्यादि) ।